“वज़ूद” सबका है अपना अपना, सूर्य के सामने दीपक का न सही, अंधेरों के आगे बहुत कुछ है……!!

“वज़ूद” सबका है अपना अपना, सूर्य के सामने दीपक का न सही, अंधेरों के आगे बहुत कुछ है……!!

“वज़ूद” सबका है अपना अपना,
सूर्य के सामने दीपक का न सही, अंधेरों के आगे बहुत कुछ है……!!

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